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गिरा पत्ता

राहों में आज अचानक हमारे सामने एक पत्ता गिरा
जो हमें सोचने पर मजबूर कर गया....
और गुजरते वक्त से हमें अवगत कर गया....
देखते ही देखते वह आंखों से दगा कर गया और कहीं दूर मिट्टी से वफा कर गया.....
वह हमें भीतर से तार कर गया और मन की गहराई पर वार कर गया....
वक्त के चक्र से कट कर वह इस तरह गिरा कि अपने वजूद को मिट्टी में ताबुत कर गया....
इस दुनिया की महिमा का बखान कर गया और हमें वास्तविकता का भान कर गया....
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