उन छूटे दोस्तो को,
पर ये करता नही है कोशिश,
हावी हो चुका है इसका दुख,
इसका अकेलापन, उस कोशिश पर
जिसे ये कर सकता था फिर से एकबार,
पहुंच सकता था गंतव्य तक हस्ते गाते,
पर मनके हारे हार है हो चुका है सार्थक,
अब सोच रहा है,नए सिरे से शुरू करना,
उस दौड़ पे यही से विराम लगाना,
हो चुका है हताश अब ये,
मर चुकी है सभी आशाएं इसकी,
ठान लिया अब अंत करना इस अकेलेपन का,
पर देखता है सरपट आते हुए बिछड़े यार,
गालिया, और ताने मारते उसके वो हमराही,
©saurabh15
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