दिमाग़,,
आँखों-आँखों में बात की है। कभी,,
किसी की धड़कन से मुलाकात की है। कभी,,
दिल,,
दिल आैर धड़कन के दाँव-पेंच में कच्चे हैं।थोड़े,
दरअस्ल अपने म्यार में सच्चे हैं। थोड़े,,
दिमाग़,,
मुख़्तसर ही सही, हर दिल एहसास रखता है।
तवील सेहरा भी ,,शिद्दत की प्यास रखता है।
दिल,,
इत्तेफाक़ है। , इनकार थोड़ी है। मुझे,,
दिल ए नादां पर इख़्तियार थोड़ी है । मुझे,
©mannjaisy
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