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आब-ए-चश्म

आब-ए-चश्म से ये आँखें नई हो जाती है,
पतझड़ के बाद फिर जैसे पौधें नई हो जाती है।
न छुपाया करो अनुराग दर्द-ए-जिगर को हद से ज्यादा,
बेसमझ बीमारियां भी अक्सर नई नई हो जाती है।
©anuragrahi