शब्दों को बयां क्या करें जब भाव में आभार ही शेष है ..
आप सब की दुआओं से हृदय में अभी तक चमकता हुआ तेज है...
पंक्तियों को सजाकर क्या करें ?
जब आपकी लिखी पंक्तियों में ही ईश्वरीय प्रेम का समावेश है
नैनो को दिखा कर क्या करें?
जिनमें आभार की नमी का ही अभिषेक है..
हाथों की दशा क्या कहें
जिनमें आभार का जवाब देते हुए ,
उत्पन्न दर्द में भी प्रेम के अवशेष है..
आपके अनमोल शब्दों का भीतर में हुआ जो प्रवेश है
वो मेरे लिए ईश्वर की समक्षता सा ही विशेष है
इसे अनुभव कराने के लिए ,
हृदय में धन्यवाद ही शेष है
धन्यवाद ही शेष है।।
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