आदमी हूँ मैं दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
गुजरा हूँ बाजार से मगर खरीददार नहीं हूँ
निराश हूँ शब्दों से दवा की नहीं जरूरत
गम की ये कमजोरी है मैं बिमार नहीं हूँ।
अफसोस है कि अभी हूँ फकत मैं तन्हा
दिनार से भरा है जेब अभी बर्बाद नहीं हूँ
तेरी फुरकत ही है जो मेरी रही कमजोरी
पहुंच जाऊं तुम्हारे पास होशियार नहीं हूं।
तेरा वक्त चल रहा है रेस के घोड़े की तरह
मैं अपने वक्त का घोड़सवार नहीं हूँ।
यारब महफूज़ रख अनुराग को बुत के सितम से
मै उस की इनायत का तलबगार नहीं हूँ।
©anuragrahi
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