J

आदत

वो वक़्त भी था जब तेरी आदत थी मुझे,
हर छोटी, बड़ी बात बतानी ज़रूरी थी तुझे |
दिन निकल जाता था तेरे आस पास,
वक़्त ना होते हुए भी वक़्त निकाल लेते थे तेरे साथ |
आज ना जाने क्यूँ तेरी कमी सी ख़ाल रही है,
तू है; फिर भी दूरी सी लग रही है।
तू मेरे इतने करीब था और किसी की ज़रूरत नहीं थी, तेरी आदतों में खुद को ही मैं भूल गई थी।
आज तेरी दूरी ने मुझे फिर उससे मिला दिया,
जिसे मैं रोज़ आईनें देखती तो थी, पर बात नहीं हो पाती थी।
आज देखा उसे मुस्कुराके तो वो भी मुस्कुरा दी, लगा जैसे वो भी मिलना चाहती तो थी पर कभी कह ना साकी,
आदतें ऐसी ही होती हैं; छूटती नहीं है,
कोई महेशा साथ हो ये जरूरी तो नहीं है,
ढूंड लुंगी फिर कोई नई आदत,
कल तक तू था आज मैं खुद हूँ अपनी चाहत।
©joy_writer