आएगा सुखद मौत अब कभी कहीं किसी से डरो ना
ला ईलाज जो है अभी तक मरज ए कोरोना।
कुछ कम हुआ किसी के जाने का गम जेहन में
और दिल के दर्द के साथ कम हुआ आंखों का रोना।
पहले तू चली गई तो खाक बाजी मार गई
बचना किसे है यहाँ अच्छी निंद अब मजबूरी है सोना।
कहाँ तक आंख रोएगी कब तक किसका गम होगा
तेरे जैसा यहां कोई न कोई है हर रोज कम होना।
तेरे मरज का तो इल्म था सबको पता था सबको
मेरा मरज महामारी है नाम है बस कोरोना।
©anuragrahi
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