कर्तव्य पथ पर तू बढ़ चल...
कदमों को थोड़ा द्रढ कर ...
भीतर को थोड़ा सहज कर...
कोशिशों को तू प्रखर कर...
हिम्मत की ऊंची डगर पर...
खुद को थोड़ा समझ कर ...
निश्चय को थोड़ा प्रबल कर...
राहों में थोड़ा संभल कर...
बढ़ चल तू बढ़ चल...
समय के आगे निकल चल...||
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