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" आघात "

लगता है ईश्वर पर हुआ गहरा आघात है...
क्योंकि मंजर में तबाही का तदाकार है...
प्रकृति भी कुछ नाराज है क्योंकि,
हुए उस पर भी कई घाव है....
लोगों के भीतर बहुत अंधकार है....
जिससे उन्होंने किया ईश्वर पर भावो का वार है...
जिसका ही आज ऐसा परिणाम है....
जिसने किया भीतर की और रुखसार है....
ईश्वर को उसी व्यक्ति से प्यार है....
जिसके भीतर सुगंधित पुष्पों का पराग है....
उसी में ईश्वर का अनुराग है....
मन की निष्छलता में ही ईश्वर का आत्मसात है....
और यही जीवन की हर व्याधि का उपचार है.....
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