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आईना

जुल्फों के घेरे में बैठ शर्माया न करो
हसीन रातों में सबनमी दीप जलाया न करो
मोहब्बत तो तुम्हारी रूह से की थी मैंने
आईने में दिखने वाले झूठ पर इतराया न करो
©aryangupta