S

आज आँखों के सामने कुछ धुंआ सा है ।

आज आँखों के सामने कुछ धुंआ सा है
ऐसा लगता है हमें कुछ हुआ सा है।
जिंदगी मेरी क्यूँ तमाशा बन कर रह गई
मेरे फितरत में तो नहीं ऐसा कुछ बुरा सा है।
मेरे रफिक मेरे हमदम दुरियां बनाने लगे मुझसे
शायद मेरी मुफलिसी उन्हें अब लगता सजा सा है।
मैं भी तो इस सच को इंकार तो नहीं सकता
मेरी हालत भटकता फकीर-ए-बाजार सा है ।
आप गर मेरे घर आऐंगे तो गुजारिश है बता के आऐंगे
अनुराग को आपके लिए करना बहुत जुगाड़ सा है।
©anuragrahi