आज चांद भी अपने घर एक मेहमां बुलाया है
अपने लिए एक खुबसुरत साथी ढुंढ लाया है।
आज तक न देखीं कभी मैंने ऐसी कुदरती नजारे
अपने मिलन से हर एक का दिल गुदगुदाया है।
बनी ठनी चमकती खुब सजी हुई थी दुल्हन
दुल्हा चांद भी आज मन ही मन खुब मुस्कुराया है।
क्या पाक मिलन क्या पाक शुरुआत रमजान की
इफ्तार में चांद ने आज हम सबको बुलाया हैं।
खुशियां बाँटो प्यार करो जात पात का न भेद करो
कुदरत ने सामने आकर ये आज हमें सिखाया है।
©anuragrahi
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