आज घर मोरी गोरी विरान हो गईल,
जबसे गईलू छोड़ीके सब सुनसान हो गईल।
तोरे ई नेहिया के असर हो गईल बा,
अंखिया में डब डब लोर भर गईल बा,
जियल ई जिनिगिया अब दुसवार हो गईल ।
आज घर मोरी गोरी..............
दिन के अजोरिया में सब गम छिप जाला,
आते आते रतिया के दिलवा में दरद उभर जाला,
फुलवा के सेजिया भी अब मलीन हो गईल।
आज घर मोरी गोरी................
जाते जाते कौन तू रोग कई दिहलू,
चांद की चकोरवा के गम में विभोर कई दिहलु,
का करी हम अब,अनुराग के संग शराब हो गईल।
आज घर मोरी गोरी विरान हो गईल,
जबसे गईलू छोड़ीके सब सुनसान हो गईल,
आज घर मोरी गोरी विरान हो गईल ।
©anuragrahi
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