A

आज का समाज

बदल गया है, चाल और ढाल.
नहीं पूछते एक दूसरे का हवाल.
पाल रखा है उर में मलाल.
ये दशा है हमारे समाज का फिलहाल.
नोक झोक के चक्कर में हो रहा बुराहाल.
लोग चरम काल में भी बुन रहा है जाल.
वे सहारा, वृद्ध, और लाचार का नहीं हो रहा ख्याल.
ये दशा है हमारे समाज का फिलहाल.

अमरेन्द्र कुमार
©amrendraku