आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
कोई चाहत पुरी ना होने पर मौत से लडने के लिए खडा हो रहा हैं
हमारे देश के बच्चो का पुरानी संस्कृति को जटकना
और किसी इच्छा के लिए पंखे पर लटकना
हाथ पर कट लगाना फैशन का काम हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
मन्दिर की घंटी बजाने से आती हैं शर्म
डिस्को या गंदगी मैं जाने को समज बेठे हैं अपना कर्म
अब तो उनका साथी बस जाम हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
आज के बच्चो का फ़िल्मों से सीखकर प्यार को बटना
प्यार ना मिलने पर एक बार मैं हि हाथ को काटना
फिर अखबारों मैं इन खबरो का बखान हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
एक प्यार के लिए एक पल मैं हिं अपनों के उपकारो को भुल जाना
घरवालों के मना करने पर पंखे पर झूल जाना
माँ-बाप के चौकलेट खाने के लिए मचलने वाले बच्चे का जहर पीना आम हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
माँ-बाप के सपनों को पुरा करने घर से बाहर जाते हैं बच्चे
बुरी संगती के जाल मैं फँस कर हो जाते हैं उनके ज्जबा कच्चे
बुरी संगती के जाल मैं फँसकर माँ-बाप के प्यार को भुल जाते हैं अच्छे अच्छे
इतिहास गवाह हैं ऐसा कदम उठाने वाला दुख की नींद सो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
दोस्तों जिन्दगी का तोफ्हा हमें एक बार मिला हैं
फिर क्युं हमें इस छोटी सी जिन्दगी से गिला हैं
जिसने सदेव सही रहा को चुना हैं उसका हिं जगत मैं नाम हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
आज का युवा कितना माहान हो रहा हैं
-Vinita
©gopalshyam
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