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आज की रात

हुई रात एक बार फिर मगर .
आज कुछ बात नई हो रखी है ..
आंखों के बंद करते हीं जो होती थी पूनम की चांद की रौशनी ...
की अब वो अमावस की काली रात हो रखी है ..
कहां उनके ख्यालों में खोए खोए कटती थी सुकून से पूरी रात मेरी..
आज उनके एक याद ने ही मेरी पूरी नींद खराब कर रखी है ..
यूं तो कभी तकलीफ ना हुआ उनके दूर जाने का मगर ..
पता नही क्यों आज इस दिल ने उन्हे याद करने की जिद कर रखी है ..
उठ जा रहा हूं अपने बिस्तर से चौंक कर यूं अचानक
क्यों! क्यों ! क्यों!
क्यों मैने उनकी तस्वीर अपने होजरे में सजाकर रखी है ।।।
©vibhu.ji