आज कल के त्यौहार, status तक ही सिमट गए हैं,
वक़्त तो बदला, जरिये भी बदल गए हैं.,
पहले, रात-दिन, दिन-दोपहर और दोपहर का कब शाम हो जाना, पता ही न चलता था,
और आज शुरुआती सुबह में भी घंटों लग रहे हैं.,
जहाँ एक रात पहले से ही खुशी, सोने नही देती थी,
वहीं उठने में सुबह, अब नखरे बढ़ गए हैं.,
गले मिलकर जहाँ बधाइयाँ, सबमे बटती थीं,
वहीं phone पर मैंसेजो के ताते बढ़ गए हैं.,
हर घर में पकवानों की खुशबू, बेहिसाब दौड़ती थी,
मगर आज तो सब, market जाने लगे हैं.,
पहले, मिलकर, साथ रहकर, सब भरपूर आनंद उठाते थे,
अब मिलना तो दूर, लोग online गुलाल उड़ाते हैं.,
जहाँ बच्चे, गलियों को शोर-गुल, और उत्साह से नवाज़ते थे,
उन्ही गलियों को हम, अब संन्नाटे में गिराते हैं.,
इंसानो की जगह, तो ले ली mobile ने,
और हम, समय को दोषी ठेहराते हैं.
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