आज मौसम की पहली बारिश है,
और हर गिरती बूंद तेरा नाम लिख रही है...
वैसे तो तू हर धड़कन में बसा रहता है,
मेरी हर सांस के साथ चलता है,
पर न जाने क्यों,
आज इस भीगी हुई शाम में
तेरी कमी कुछ ज़्यादा ही सता रही है...
काश तू मेरे पास होता...
हम एक ही छाते के नीचे चलते,
और बारिश शरारत से हमें छूती रहती...
हवा धीरे से तेरे बालों को बिखेर देती,
और मैं बस तुझे देखती रह जाती।
फिर एक तेज़ झोंका आता,
छाता कहीं दूर उड़ जाता,
और मैं घबरा कर तेरी बाहों में सिमट जाती...
जैसे सारी दुनिया से ज़्यादा महफूज़ जगह
बस तेरा सीना हो।
भीगी हुई हवाओं में,
तेरी खुशबू घुल जाती,
और मेरे दिल की हर ख्वाहिश
एक नरम सी धुन बनकर तेरे गिर्द मंडराती।
बहुत याद आ रहे हो, जान...
सोचती हूँ,
क्या तेरे शहर में भी आज यही बारिश हो रही होगी?
क्या कोई बूंद तेरे चेहरे को छूकर
मेरी तरह तुझे भी बेचैन कर रही होगी?
क्या तू भी मेरी तरह
खिड़की के पास खड़ा,
बारिश की इन बूंदों में
मेरा अक्स ढूंढ़ रहा होगा?
क्या तू भी मेरे साथ गुज़रे लम्हों को
फिर से जी रहा होगा?
आज की ये बारिश
सिर्फ आसमान से नहीं बरस रही...
ये मेरी मोहब्बत है,
जो हर बूंद बनकर
तेरे पास पहुँचना चाहती है।
और मैं...
मैं हर गिरती बूंद में
बस तेरा एहसास ओढ़े बैठी हूँ,
इस उम्मीद में,
कि किसी हवा के झोंके के साथ
तू आकर मुझे फिर से अपनी बाहों में भर लेगा...
और ये भीगी हुई शाम
एक खूबसूरत याद बन जाएगी।
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