आज मयकशी की तमन्ना है,
मुझको मय पिला दो यारो,
मय टूटे आशिक़ का सहारा है,
मुझपे दरिया-ए-मय बहा दो यारो।
ग़म-ए-ज़िंदगी भुला करके,
जाम-ए-महफ़िल सजा दो यारो,
दिल में जो दर्द-ए-मोहब्बत हो,
आज वो अश्कों में बहा दो यारो।
जाम-ए-साक़ी शब में छलकने दो,
होश को भी हद से गुजरने दो।
मय का पैमाना पिला दो खुलकर,
आज पल भर का साथ निभा दो यारो।
मैं तिश्ना-ए-लब हूँ मुद्दत से,
तुम हर मयकश को बुला दो यारो।
मय की ख़ुशबू बेशुमार हो इस शब मे,
मेरी तिश्नगी-ए-मय बुझा दो यारो।
© विशाल सैनी