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, आज फिर

आज फिर जवानी चीख रही,
"बचपन" लोटा दो।
आज फिर गलतियां कह रहीं,
एक ओर "मोका" दे दो।
आज फिर जिम्मेदारी कह रहीं,
मेरी "मासुमियत" दे दो।
आज फिर " दुनिया" बोल रहीं,
एक बार "दुनियादारी" दिखला दो।
आज फिर नफ़रत चिख रहीं,
"प्यार" करना सिखा दो।
आज फिर "मां" बिनती कर रही,
मेरा‌ "बेटा" दे दो।
आज फिर एक "पिता" गुजारिश कर रहा,
मेरी "बेटी" झोली "खुशियों" से भर दो।
आज फिर दर्द बयां कर रहा,
"उम्मीद" का दीपक जला दो।
आज फिर "दोस्त" पुकार रहा,
एक बार फिर "दोस्ती" निभा दो।
©urvi13