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आज फलक का रंग गहरा लाल सा है

आज फलक का रंग गहरा लाल सा है,
तेरे बदन से आती खुशबु गुलाल सा है।
गुलाबों ने अपनी खुशबु बिखेड़ना छोड़ दिया,
तितलियों का रूख भी तेरे तरफ़ कमाल सा है।
तेरी मदहोश सी ये आंखें रगबत-ए-दिल है,
मधुशाले सा तेरे होंठों का रंग सुर्ख लाल सा है।
ये रेशमी जुल्फें जो हवाओं से गुफ्तगू करती है,
ढकी हुई तेरी यौवन को एक ढाल सा है।
ये बलखाती कदम ये लचकती तेरी कमर,
तेरी हर अदा सावन में मोरनी की चाल सा है।
तुम दुर रह कर भी हरदम मेरे पास रहती हो,
दिल में जैसे महबूब की अमानती रूमाल सा है।
©anuragrahi