आज़ शाम तो निकल कर टहलने चली आओ
बहाने कोई भी लेकर मिलने चली आओ।
बड़ा बेचैन सा हो गया है न जाने क्यों मन
हालात-ए-दिल है ख़राब मिलने चली आओ।
गमों के साथ ये गहरी खामोशी और तन्हा दिल
तुम्हारी वस्ल मरहम है मिलने चली आओ।
जबसे तुम रूठी हो तो मुझे ऐसा लगता है
ये किस्मत मुझपे बेरहम है मिलने चली आओ।
मेरा दिल आ फंसा है लम्बी जुदाई के भंवर में
तेरे दिल को भी ख़बर है कभी मिलने चली आओ।
फिजाओं का मिजाज और गुलों की महक बतातीं है
अनुराग से मिलने का मौसम है मिलने चली आओ।
©anuragrahi
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