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आज तेज हवा चली थी।

आज तेज हवा चली थी
शाख-ए-शजर लचक गया होगा
हमने अजनबी लोगों को देखा था
फल-ओ-बहार लुट लिया होगा।
वो शख्स पैदाइशी नामचीन न था
गुजारा उसने भी किया होगा
अपने साहस नेक इरादा से ही
लोगों का दिल जीत लिया होगा।
हमारे भविष्य हमारे बच्चे है
सपनों के इनके संभालना होगा
जो महापुरुष महात्मा हैं या थे
उनका भी अपना बचपन रहा होगा।
किस युग की बात करें किस कालखंड में जाएं
आज जैसा ही हर वक्त रहा होगा
कोई दर दर मांगता भिख
कोई हिरे मोतियों पे सोता रहा होगा।
©anuragrahi