आज तक तो यह मेरा आशियाना है
पता नहीं कल मुझे कहाँ जाना है।
फकत मेरे विचारों का हम ख्याल है चंद लोग
वैसे दुश्मन तो मेरा सारा जमाना है।
हमें कहीं दिखता तो नहीं मगर ऐसा लगता है
मेरे शायरी का भी कुछ लोग दिवाना है।
वक्त को मंजूर हो गर न हो हर एक को आजमाओ
पांव जमाने का यह नुस्खा पुराना है।
मैने बांध तो ली है तजुर्बे की पट्टी अपने सर
अब गलत सही परखते परखते मर जाना हैं।
©anuragrahi
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