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आजकल के रिश्ते सब अपने नहीं होते।।

मस्तस्क ही झुक गई अपनी,
कितने हृदयों से पीड़ा निकले,
क्या उठाऊं सवाल सत्रू पे,
जब अपने ही कीड़ा निकले।
©sochamit