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आकर देखो

आकर देखो ,
यूँहीं नहीं आती हमें शिशकिया ,
छू कर देखो,
यूँहीं नहीं आती हिचकियाँ,
दिल से दिल लगाकर देखो ,
यूँही नहीं डूब जाती हैं कश्तियाँ ,
निभाकर देखो मिट जाती है हस्तियाँ ।
बन ,तार लिपट गयी हैं ,
हमारी जिन्दिगियाँ,
दूर से इशारा करते हैं लोग,
ये वहीं तारा हैं ,जो लेता था हिचकियाँ ,
आकर देखो यूँही नही आती शिशकिया ।
©sandeepgup