खोई हुई सी भ्रमित आँखें
जाने कब ,किसे खोजती हैं
जाने कहाँ-कहाँ डोलती हैं
अवसाद सा घोलती आँखें
चुपचाप सी किन्तु बोलती आँखें
कितनी ये नादान हैं
फ़िर भी हर बात का ज्ञान है
गहरी है तो झील आँखें
लम्बी हैं तो मील आँखें
इंतज़ार में पथराई सी
प्यार में नरमाई सी
दुःख में बरसती आँखें
कुछ पाने को तरसती आँखें
हर रंग में बात करती आँखें है
हर ढंग में बात करती आँखें
शब्द चाहे ना रोलती हैं
पर आँखें सब कुछ बोलती हैं
🌹🌹🌹
©vikasgarg
V