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आंखों में इक तस्वीर बसी है जिसे खोया नहीं।

आंखों में इक तस्वीर बसी है जिसे खोया नहीं
देर रात हो चुकी और अभी तक मैं सोया नही।
ग़म के बारिश भी धो न सका उन यादों को
जो युंही बिखड़े पड़े थे जिन्हें कभी संयोया नहीं।
न जाने क्यूं ये वादियां मुझे आवाज देती है
तुने मुझे खो दिया मैंने तुझे अभी खोया नहीं।
चार-सू से है खुला इस दिल का दरवाज़ा मगर
कह सकें जो हालात-ए-दिल वो लब-ए-गोया नहीं।
दगा उस बेवफा ने दी और सजा मुझ गरीब को
कांटा हूं जिंदगी भर मैंने जिसे बोया नहीं।
क्या कहूं मैं खुद में इक ऐसा शख्स हूं अनुराग
जो ग़म से पत्थर हो गया पर कभी रोया नहीं।
©anuragrahi