वो अपने ही घर को संगसार करने लगे हैं
आंखों पर नहीं अब कानों पर ऐतबार करने लगे हैं।
कभी दिल की धड़कनों को भी सुन लिया होता
जाने क्यूं अजिब सी व्यवहार करने लगे हैं।
अब क्या खौफ हों इस दरिया का उन्हें
जब समंदर आसानी से आर-पार करने लगे हैं।
हमने तो किसी एक को दिल दिया और रोगी बन बैठा
वो तो दिलों के साथ व्यापार करने लगे हैं।
आप है मेरे अज़ीज़ इसलिए बता देता हूं अपनी बात
मेरे जिंदगी से अब वो बहुत खिलवाड़ करने लगे हैं।
अनुराग के सादगी पर कुछ तो दाद दो जालिम
बिना सोंचे बिना परखें तुमसे प्यार करने लगे हैं।
©anuragrahi
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