V

आंसू

आंख से जन्मा, पलकों से छलका छोटा सा दाना हूं मैं,
आंख से निकल कर बन जाता अंजाना हूं मैं,
दुख के आलम में आंख से छलका आता हूँ,
सुख में भी आंख से छलका आता हूँ,
विदाई के समय दुल्हन की आंख से गिरता,
गम की आहट में हर एक आंख से गिरता,
पानी की एक बूंद हूं, हर एक आंख से फिसलता,
खुशी हो या गम, आंख से मैं ही तो फिसलता,
पति पर आफत बन जाऊं, यदि पत्नी की आंख में आंऊ,
मां के प्राण अटक जाएं, बच्चे की आंख से बह जांऊ
विकास गर्ग
©vicky