ऑखों मे कैसे तिलमिलाते है येआंसू
न जाने कहाँ से आते है ये आंसू
जहाँ घेर लेता अंधेरा खुशी को
वहाँ दीप से जगमगाते हैं येआंसू
नहीं टूटता आईना सपनों का
मगर प्यार से टूट जाते हैं ये आंसू
अगर सूख जाये सावन मिलन के
तो यादों की बरसात कराते है ये आंसू
कभी बाढ़ आये कभी खेत सूख जाये
गरीबी के किस्से सुनाते हैं ये आंसू
किसी की जिंदगी में हंसी लाने की खातिर
सुबह शाम आकर रुलाते हैं ये आंसू
न बादल न बरखा, न सरिता न सागर
वहां मन की वेदना मिटाते हैं ये आंसू।।
©Meenakshi singh
©luckypande
L