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आंसू

आज दिल चाहता है कि बहुत रोए
पर विडंबना ये है कि आंसू कहा से लाए
ज़िंदगी ने कुछ इतना रुला दिया
हमारे सभी आंसुओं को ही सुखा दिया
दिल चीख तो रहा है बिना आवाज़
चाहता है कि कोई तो आजाए
एक बार बिन कहे कुछ
गले से लगा जाए
बहुत रो लिए बेवजह की बातों पर
आकर चुप करा जाए
मैं हूं ना साथ तुम्हारे
कोई इतना ही बता जाए।।
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