भीतर की गहराइयों में एक भाव है ..
,उसी से हमारे जीवन में छांव है ..
चंचलता की चादर के तले भीतर में,
शांति भरा एक गांव है..
जहां मिलता हृदय को आराम है..
वक्त बिताया करते हैं हम वहां ,
जगत प्रवेश वर्जन का लगा जहां पैगाम है..
जहां ईश्वर के संग का दरमियाऩ है ..
जहां पर पिघलती मासूमियत और समर्पण का प्रभाव है..
जहां शब्दों की तरंगों में मधुरता का फैलाव है ..
जहां आत्मीयता को देखता गहरा समभाव है ..
जहां नैनऩ से निकलता अश्रु का भाव है..
जहां हर स्पर्श में ईश्वर की तदरूपता का सद्भाव है..
मन की सीमितता से ,
इन पंक्तियों में उजागर उस भाव का आभार है ..
उस भाव का आभार है..........
©myemotions
M