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आंतरिक एहसास

ह्रदय से जब हम बात करते हैं
तो मासूमियत की छांव करते हैं।
ईश्वर को महसूस कर अच्छाइयों का आभास करते हैं
मंद-मंद अपनी सांसों में प्रकृति का साथ भरते हैं
और मुस्कुरा कर बादलों से व्यथा ऐतबार करते हैं
अचानक बादल पर्वत के निकट आकर,
उनसे कुछ बात करते हैं
और पर्वत को अपनी ओट छिपा ,
दृश्य अद्भुत निर्माण करते हैं
फिर हृदय के एक कोने में हम इस भाव को,
प्रतिबिंबित बार-बार करते हैं
पन्नों की कतारों में शब्द कई हजार भरते हैं
और भीतर की निगाहों में करुणा की भरमार करते हैं
धीरे-धीरे सोने का प्रयास करते हैं
और ईश्वरीय गोद का आभास कर
निद्रा की गहनता से मिलान करते है।।
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