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आओ प्रिय आओ प्रिय

आओ प्रिय आओ प्रिय
खालिपन को मेरे भर जाओ प्रिय
क्षुब्ध मन विरल जीवन को
स्नेह नयन से तर जाओ प्रिय
प्रित हमारी हो रीत हमारी
जग में प्रेम असर दिखाओ प्रिय
राधा श्याम की है जितनी प्यारी
दिल में मेरे घर कर जाओ प्रिय
तुम बिन जीवन है फिंका फिंका
मधुर स्वाद भर जाओ प्रिय
सुरभि सुमन निश्छल ह्रदय से
दुःख दर्द मेरे सब हर जाओ प्रिय
कौन है जाने कब हो जाना
आ कर बांहों में भर जाओ प्रिय
सब ने हमको बस ठोकर मारा
अब तुम ठोकर न मार जाओ प्रिय
आओ प्रिय आओ प्रिय
खालिपन को मेरे भर जाओ प्रिय।

©anuragrahi