आप आए तो जिना कुछ आसान हो गया
वगरना तो था जिंदगी शमशान हो गया।
मेरे चार-सू मेंं था तारीक फैला हुआ अब तक
आपके क़दम से रात से विहान हो गया।
अब क्या डरना लोगों के नुक्ताचीनी से
किस्से जब मुहब्बत के सबके ज़ुबान हो गया।
महक गुलों की आ रही है मेरे मरहले तक
फिजाओं से भी अपना प्यार ब्यान हो गया।
आज़ फिर सज संवर गया है ये मेरी जिंदगी
लग रहा था कल तक जो विरान हो गया।
अब न जाइए कहीं अनुराग को छोड़कर तन्हा
ये नादान दिल है अब जवान हो गया।
©anuragrahi
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