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आप ऐसे तो नहीं थे।

आप ऐसे तो नहीं थें आखिर क्यूं ख़फ़ा हो गए

आदतें तो वफ़ा की थी और बेवफा हो गए

मुसलसल एक ही सवाल ज़ेहन में आती है

किआप अब मेरे किस नफ़स की हवा हो गए

ख़ुदा ने किस नियत से बुला लिया तुम्हें

याद किए हुए तुमको कई लम्हा हो गए

अब कौन सा दर्द मुझे रूला पाएगा

फुरकत से लब जो इतने ख़फ़ा हो गए

बहुत टिस खलिस थी तुमसे मुझे

देखो न कैसे सब अब रफा-दफा हो गए

टिप-टिप गिरती सावन की बुंदे या चांदनी रात

मेरे लिए सब अब बस जफ़ा हो गए

तुम जुगनू बनों चांद बनों या बनों तारें

इन आंखों के लिए ख्वाबों का फ़लसफ़ा हो गए।©anuragrahi