आप अंदर से कुछ बाहर से मयार नज़र आते हैं
मेरी नजरें ब्यां कर रही आप होशियार नज़र आते हैं।
आप कभी बेनकाब मेरे सामने भी तो आइए
नक़ाबों में तो सभी दिलदार नज़र आते हैं।
मेरी जिस्म है शरारों से बनी मुझसे क्या वास्ता
आप तो हिरों के खरिददार नज़र आते हैं।
क्या मैं अब भी आप के लिए कोई काम का हूं
नहीं नहीं! आपकों तो मुहब्बत बेकार नज़र आते हैं।
ये सच है तेरी महफ़िल सितारों से जगमगा रही है
हम जैसे जुगनूएं तो वहां बिमार नज़र आते हैं।
सजी है बज़्म शोहरत-ओ-दौलतमंद कामयाब लोगों से
मगर अनुराग जैसा तेरा दिवाना दो चार नज़र आते हैं।
©anuragrahi
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