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आप क़रीब जो आ कर दिल को

आप क़रीब जो आ कर दिल को
मेरे कभी छू जाएं तो
मत पुछो उस वक्त का आलम
आप हमें गर मिल जाएं तो।
मुश्किल है अब जिंदा रहना
दर्द जुदाई का सहते रहना
चोंट लगी है इस दिल पे ऐसे
तिर ज़िगर के गया पार हो जैसे
ज़ख़्म ये मेरे ख़ुद भर जाएंगे
लेकर नाम मुझे गर बुलाएं तो।
आप क़रीब जो आ कर दिल को
मेरे कभी छू जाएं तो।
ये मयकश निगाहें-ओ-जुल्फों की आंचल
मुझे कर देंगी इक दिन ये पागल
तेरी याद निंद अब चुराने लगीं
ख्वाबों में रोज़ जो तुम आने लगी
रूकेंगी अब ये अश्कों का बहना
आ कर मुझे तुम गर मनाये तो।
आप क़रीब जो आ कर दिल को
मेरे कभी छू जाएं तो।
मत पुछो उस वक्त का आलम
आप हमें गर मिल जाएं तो।
©anuragrahi