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आ,पास आ,दिल को मेरे एक भरोसा दे जा ।

आ,पास आ,दिल को मेरे एक भरोसा दे जा
ऐ जोहरा जबीं,अपने जबीं पर एक बोसा दे जा।
आज क्यूँ खोई खोई गुमसुम बैठीं हो सेज-ए-बहार पर
चेहरे पर चतुर चंचल चितवन सी एक ओस्सा दे जा।
एक तब्बसुम-ए-यार पर कुर्बां है ख्वाहिश जिने की
थोड़ा ही सही प्यार का दिल से एक दिलाशा दे जा।
देखों इन्हें,बिमार कितने हैं बैठे तेरे राहगुज़र में
नाजुक हाथों से अपने इस बार एक-एक तोशा दे जा।
तिखे-तिखे बातों से तो जेहन हो गया तिखा-तिखा
अब अनुराग को यौवन रस का स्वाद एक नौशा दे जा।
©anuragrahi