आसमां से तारें जमीं पर लाया जाए
खुबसूरत इक बज्म सजाया जाए।
उनके महफिल में है सितारों की रोशनी
इस अंजुम को चिरागों से जगमगाया जाए।
मेरे नग्में है ख्वाबिदा चेहरों के लिए
अपनी हर आरजू को आज गाया जाए।
वो भी खड़े है इस्तिफाकन इस महफिल में
कह दे दिल-ऎ-बात और न छुपाया जाए।
बाग में टहलने की आदाब होती है
किसी तितली को फुलों से न उड़ाया जाए।
जुगनूए खुर्शीद की हम शक्ल हुआ करती है
चलो पकड़ कर अनुराग रोशनी घर लाया जाए।
©anuragrahi
S