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" आत्म सुधार"

बुरी भावनाओं का नाश कर
तु भीतर में विश्वास कर
ईश्वर का आभास कर
अंधियारे में प्रकाश कर
विचारों को एकाग्र कर
लक्ष्य की तलाश कर
मन की विपरीत कश्तियों को,
तु थोड़ा किनार कर
हौसलों के परिंदों पर
तू खुद को सवार कर
बढ़ता चल तु बढ़ता चल
कदमों की बढ़त में बहता चल
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