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आत्मा का निर्मल स्पर्श

आत्मा का निर्मल स्पर्श

बालपन का स्वप्न मेरा

विचरण करूं आकाश में,

चंचल चित्त के पंख लगा

विश्राम करू नीड़ में,

भूल जाऊ बैर सब

आत्मा को जोड़ लू,

निर्दोष इस आत्मा के

सारे दोष छीन लू,

नियम से निर्मित करू

अपने जीवन नीति को,

कोमल वचन से थाम लू

दृढ़ता की डोर को,

करू दया का दान प्रतिदिन

निर्दय हृदय के रोग को,

और प्रेम की सौम्यता से

जीवित करू प्राण को,

विशुद्ध ममता में विलीन

स्नेह का विचार हो,

अनंत उस व्योम सा

मेरी आत्मा में प्रेम हो,

वसुंधरा की गोद में

वृक्ष सा विकास हो,

प्रकृति की रचना, से ही

मेरा जन्म हो।
#dreams#innocentHeart#peace