दृश्य रहस्य बन जाता है यदि उसे सदृश्य उतरा ना जाए
लक्ष्य परिदृश्य बन जाता है यदि कदम बढ़ाया ना जाए..
गुरु शिष्य बन जाता है यदि इससे कोई सहारा ना जाए
धर्म अधर्म बन जाता है यदि उसे निभाया ना जाए
वृक्ष बीज बन जाता है यदि उसे सीचा ना जाए...
उसी प्रकार,
मनुष्य शुन्य बन जाता है यदि उसे भीतरी भावों की संख्या का पाठ पढ़ाया ना जाए.....
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