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आवारा

कुछ न कही टुटा हुवा तारा ही सही हूं मैं
बस तेरे चंद गलियो का आवारा ही सही हूं मैं
ये क्या जाने की हर पल उन्हें जीते हूं
भले सबकी नजरों मैं हरा ही सही हूं मैं।

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