आवज निकल नहीं रहे जुबां से दिल भारी है
ये कैसी बेबसी ये कैसी बिमारी है।
हमें किए बिन इत्तला ही वो रकिब के घर
जाने को कर ली पुरी तैयारी है।
सुख़नवर जिक्र क्यूँ न करें गुजरे उन लम्हों का
जब इस दिल पर गुजरी हर वाक्या नागवारी है।
नफ़स नफ़स में हैंआप इब्तिदा से इंतिहा तक
भुल न पाना आपको ये मेरी लाचारी है।
अभी तक मैं होश-ओ-हवास में हूं जिंदा हूं
यह मेरी अपनी हुनर और बुर्दबारी है।
मैने चांद लाया आप एक जुगनू ना ला सकी
ये आपकी कैसी मुझसे अय्यारी है।
©anuragrahi
S