अब आपको तुम कहना रास नहीं आता।
अब आपको “तुम” कहना दिल को रास नहीं आता
,इस लफ़्ज़ में वो नर्मी-ए-मोहब्बत कहाँ नज़र आता।
जब लबों पर “आप” का नूर उतर आता है,
तो दिल का हर ज़र्रा अदब से झुक जाता है।
“तुम” में शरारत की खुशबू ज़रूर बसती होगी,
मगर “आप” में इश्क़ की एक नाज़ुक सी सादगी होती है।
जैसे रात की ख़ामोशी में चाँदनी उतरती है,
वैसे ही आपकी याद मेरी रूह में उतरती है।
जब मैं धीमे से पूछती हूँ — “आप कैसे हैं?”
मेरी हर दुआ चुपके से आपका नाम कहती है।
जैसे सजदे में झुकी कोई मासूम सी इल्तिज़ा
वैसे ही मेरा दिल आपकी चाहत में रहता है।
आपको “आप” कहना सिर्फ़ एक लफ़्ज़ नहीं,
ये मेरे इश्क़ का सबसे हसीन अंदाज़ है।
इसमें अदब भी है, इसमें नाज़ भी है,
और मेरी रूह का छुपा हुआ राज़ भी है।
कभी-कभी आपकी याद ऐसी उतरती है दिल में,
जैसे गुलाब की महक ठहर जाए महफ़िल में।
और तब लगता है —मेरी हर साँस, हर ख़्वाब, हर दुआ…
बस आपकी ही राह तकती है।
क्योंकि मेरे लिए “आप”सिर्फ़ एक पुकार नहीं…
मेरी मोहब्बत की सबसे पाक,सबसे नर्म, सबसे रूहानी आवाज़ है।-शिवन्या