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अब अपने ही दिल कि दिमाग से बनती नहीं

दिल याद करता है तुम्हे ,दिमाग केहता हैं भूल जा,
अब तेरे चक्कर मे मेरे दिल और दिमाग़ की बनती नहीं,
अब इस कसमकश में हु की दिमाग केहता हैं भूल जा तो दिल केहता हैं धड़कना छोड़ दूँगा, ओर दिल केहता याद करू तो दिमाग केहता हैं चलना छोड़ दूँगा. अब तू ही बता करू तो क्या करूँ....!!
©rohit123