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अब हम प्यार के बीज नहीं बोते हैं

अब हम प्यार के बीज नहीं बोते हैं

जो कभी सबको हंसाते थे अब खुद रोते हैं

खेल समय का भी ये बहुत निराले होते हैं

बहुत तेजी से पलट रही है नीयत हमारी

टूटे हुए हार को अब हम नहीं पिरोते हैं

नया नस्ल है नया रिवाज़ है नया जमाना है

गुज़रे यादों को आंसुओं से अब नहीं भिगोते हैं

अब्र-ए-जज्बात तू न छा आस्मां-ए-दिल पर

अब हम प्यार के बीज नहीं बोते हैं

क्या सितम हैं मैं ये कभी नहीं समझ पाया

अनुराग को गैर प्यार करते हैं अपने कोसते हैं।